महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा 7 जुलाई को, भगवान जाएंगे मौसी के घर

अंबिकापुर। सहस्त्रधारा स्नान के बाद महाप्रभु बीमार पड़ गए हैं जिसके कारण भगवान जगन्नाथ मंदिर का कपाट बंद हो गया है। मान्यता अनुसार अब स्वस्थ्य होने के बाद महाप्रभु अपने भाई व बहन के साथ अपनी मौसी के घर जाएंगे। सात जुलाई को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।

जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ के स्नान का आयोजन 22 जून को आयोजित किया गया। प्रति वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा बहन को सहस्त्रधारा स्नान कराया जाता है। जगन्नाथ जी को 35 घड़े से, बलभद्र को 33 घड़े, सुभद्रा को 22 घड़े और सुदर्शन चक्र को 18 घड़े से स्नान कराया जाता है। इस तरह भगवान के विग्रहों को 108 घड़ों के जल से सहस्त्रधारा स्नान करवाया जाता है। माना जाता है कि स्नान के पश्चात महाप्रभु जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं। इस कारण से 14 दिनों के लिए मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए बंद कर दिए जाते हैं और भगवान एकांतवास में चले जाते हैं। इसे अनवसर काल भी कहा जाता है।

महाप्रभु जगन्नाथ जी को जड़ी बूटी से बना काढ़ा, फलों का रस, खिचड़ी दलिया का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष सात जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी। इसकी भव्य तैयारी उत्कल समाज व जगन्नाथ मंदिर समिति ने प्रारंभ कर दी है। रथ के मरम्मत व मंदिर के रंगरोगन का कार्य अब अंतिम चरणों में है। समिति द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी रथयात्रा के लिए काफी तैयारियां की गई हैं।

रथयात्रा दोपहर में पूजा उपरांत एक बजे निकलेगी, जो शहर के मुख्यमार्गों से होते हुए देवीगंज मार्ग स्थित दुर्गा बाड़ी प्रांगण में पहुंचेगी यहां महाप्रभु अपनी मौसी गुंडीचा के घर 9 दिनों तक रहेंगे। इस दौरान उनकी पूजा व प्रतिदिन का भंडारा दुर्गा बाड़ी प्रांगण में ही होगा। नौ दिनों तक जगन्नाथ मंदिर के पट बंद रहेंगे।

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