करजी का स्टेडियम प्रशासन के लिए बना सिरदर्द, हाईकोर्ट ने पीटीशनर को कहा प्रशासन से जानकारी मांगिये, नहीं मिले तो फिर दुबारा आइये

अम्बिकापुर-सरगुजा जिले के करजी में बने स्टेडियम को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। एक तो उस योजना और राशि से स्टेडियम बना जो सालों पहले बंद हो चुकी है, जिसकी राशि केंद्र को लौटाई जानी थी, किन्तु लौटाया नहीं गया। वहीं जिला कार्यालय के ही एक बड़े अधिकारी कहते हैं कि पूर्व में इस राशि को खर्च करने के लिए प्रदेश स्तर पर सचिव स्तर का पत्राचार भी हुआ, लेकिन रायपुर से इस राशि को खर्च करने को लेकर कोई मार्गदर्शन नहीं दिया गया और फाईल लौटा दी गई। वहीं दूसरी ओर इस स्टेडियम के निर्माण में सारे नियम कानून को ताक में रख कर निर्माण करा दिया गया। जिला से कलेक्टर सरगुजा द्वारा इस कार्य हेतु ग्राम पंचायत करजी को एजेंसी बनाया गया। किन्तु बाद में जनपद स्तर पर पंचायत से स्वयं ही कार्य एजेंसी बन कर कार्य कर दिया गया है। इसके बाद जब इस पूरे कार्य का विवरण मांगा गया तो विवरण देने से लगातार आनाकानी की जाती रही। कार्य से जुड़े तकनीकी लोग बताते हैं राशि की पूरी तरह से बंदरबाट की गई। राशि का कैश आहरण एवं अन्य खातों में ट्रांसफर कर पूरा निर्माण करा दिया गया। इस स्टेडियम के निर्माण पर सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि यह स्टेडियम जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता के गृह ग्राम में बना है। इतना बड़ा स्टेडियम पूरे नियम कानून को ताक में रख कर बना दिया गया, उन्होंने इस पर सवाल क्यों खड़ा नहीं किया, उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन वे चुप्पी साधे बैठे हैं। ये वहीं राकेश गुप्ता हैं, जो भाजपा के कार्यकाल में जिला पंचायत सदस्य रहते हर छोटी-बड़ी योजनाओं में सवाल खड़ा किया करते थे। सायकल की खरीदी से लेकर महिला बाल विकास और तमाम योजनाओं को लेकर जिला पंचायत की सामान्य सभा में लगातार बवाल खड़ा करते थे। लेकिन उनकी नाक के नीचे घटित उनके गृहग्राम के इस भ्रष्टाचार में चुप्पी साधे बैठे हैं। ये वर्तमान में सरगुजा जिला कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं।

करजी में बन रहे इस स्टेडियम की शिकायत मंत्री से लेकर, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, मुख्यमंत्री तक हो चुकी है, लेकिन सबने चुप्पी साध रखी है। कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ को जांच करने का पत्र लिखते हैं, जिला पंचायत सीईओ, आरईएस के ईई को तीन दिवस के अंदर जांच कर प्रतिवेदन देने हेतु पत्र लिखते हैं। किन्तु अंतोगत्वा पुरे मामले में कोई कार्यवाही नहीं होती, न तो कलेक्टर इस पुरे मामले की कोई जांच कराते हैं और न दुबारा संज्ञान लेते हैं कि इतनी बड़ी राशि का कार्य था क्या हुआ, कोई जांच हुआ या नहीं, न ही जिला पंचायत सीईओ इस पर कोई संज्ञान लेना उचित समझते हैं। अंत में थक हार कर भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले आवेदक अभय नारायण पाण्डेय ने बिलासपुर हाईकोर्ट में केस फाईल कर मामले की जांच एवं कार्य के कागजात नहीं देने संबंधी मामला प्रस्तुत किया। सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पाण्डेय बताते हैं कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि आप पुनः संबंधित कार्यालयों में जाईये और हमारी ओर से आवेदन लगाईय यदि फिर भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराया जाता तो फिर हमारे पास दुबारा आईये।

अब करजी के इस अवैध स्टेडियम के मामले में देखना यह है कि क्या हाईकोर्ट बिलासपुर के निर्देश के बाद भी क्या कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, आरईएस के ईई कोई कार्यवाही अथवा जांच करते हैं या फिर हाईकोर्ट के निर्देश की भी अवहेलना करेंगे और फिर आवेदक को दुबारा भ्रष्टाचार की जांच हेतु हाईकोर्ट बिलासपुर की शरण में जाना होगा।

https://youtu.be/kUsmtzCE9MI

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