मवेशियों के साथ इंसान पी रहे ढोढ़ी का पानी, सड़क बिजली तक की सुविधा नहीं शासनतंत्र व क्षेत्रीय विधायक के ढोल की पोल खोल रहे मैनपाट ब्लॉक के आश्रित गांव


अंबिकापुर।
सरगुजा जिले के मैनपाट थाना क्षेत्र अंतर्गत ऐसे भी गांव हैं, जहां कोई अपनी लड़की का विवाह नहीं करना चाहता है। ऐसा नहीं है कि यहां के लड़के इस काबिल नहीं, इसके पीछे कारण मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जो क्षेत्रीय विधायक व शासनतंत्र के ढोल की पोल खोल रहा है। कितनी सरकारें आई और चली गई, पर इनकी बदहाली को दूर करने का बीड़ा किसी ने नहीं उठाया। जी हां…व ग्राम पंचायत परपटिया के आश्रित पारा ग्राम ढतेवा, पनहीपखना, दलदली व सिंगढोढ़ी में आज भी पानी, बिजली व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से लोग महरूम हैं। यहां के ग्रामीण ढोढ़ी व झरना का दूषित पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। गांव में विद्युत खंभा व तार तो लगा दिया गया है पर सारे उपकरण निम्न स्तर का होने के कारण आए दिन ब्लैक आऊट की समस्या बनी रहती है। मंगलवार को अंबिकापुर कलेक्टोरेट पहुंचकर जनदर्शन में ग्रामीणों ने अपनी समस्या रखी। इनका कहना था कि गांव में बिजली, पानी व सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण कोई उनके गांव में अपनी लड़की का विवाह नहीं करना चाहता है। बता दें कि मूलभूत सुविधाओं की वर्षों से बाट जोह रहे महिला-पुरूषों का जत्था मैनपाट थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत परपटिया के आश्रित पारा ढतेवा, पनहीपखना, दलदली व सिंगढोढ़ी से पिकअप में सवार होकर अंबिकापुर कलेक्टोरेट में मंगलवार को होने वाले जनदर्शन में पहुंचा था। इन पर पत्रकारों को नजर पड़ी तो उन्होंने अपनी पीड़ा को सामने लाया। ग्रामीणों ने बताया उनके गांव में आज भी पीने का शुद्ध पानी नहीं है। ढोढ़ी व झरना का पानी पीने के लिए वे मजबूर हैं। इसी ढोढ़ी व झरना का मवेशी भी पानी पीते हैं। इनका कहना था शासन-प्रशासन को मवेशी व इंसान में फर्क समझ में आज तक नहीं आ पाया है। कई बार वे अपनी समस्या से जिला प्रशासन व विधायक को अवगत करा चुके हैं, बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
चारों पारा में 150 लोगों का है बसेरा
गांव के सरपंच भागीरथी लकड़ा ने बताया कि चारों पारा में लगभग 150 घर है, जिसमें मझवार, उरांव, कोरवा जाति के लोग निवास करते हैं। गांव में आज भी बिजली का अभाव है। बिजली पोल व आवश्यक उपकरण तो लगाए गए हैं, पर निम्न स्तर का सामान होने के कारण बिजली अपूर्ति नहीं हो पाती है। वे आज भी अंधेरे में रहने को विवश हैं।
गर्मी में पानी बिना हाल-बेहाल
गांव में बोरिंग की सुविधा नहीं होने के कारण ढोढ़ी व झरना ही ग्रामीणों की प्यास बुझाता है। गर्मी के मौसम में यह भी सूख गया है। ऐसे में काफी दूर से दूसरे ढोढ़ी से पानी लाकर प्यास बुझाने वे विवश हैं। गांव के वीरसाय का कहना है कि गांव में बिजली, पानी व सड़क जैसी सुविधा नहीं होने से लोग उनके गांव के लड़कों से अपनी लड़की का नाता जोडऩे तक से कतराते हैं।

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