बटेर पालन बना महिलाओं के लिए आजीविका का साधन

अम्बिकापुर / ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने तथा स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना के तहत ग्रामों मे बनाये गए गोठान अब फलीभूत होने लगे है। अम्बिकापुर जनपद के आदर्श गोठान केशवपुर में देवी स्व सहायता समूह की महिलाएं बटेर पालन को आजीविका का साधन बना अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रही है। बटेर बेचकर पहली बार मे कमाए 5 हजार रुपये आमदनी।

देवी स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती आरती यादव ने बताया कि बटेर पालन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के द्वारा भी मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बटेर के अंडों से चूजा निकलने के 45 दिन बाद बटेर वयस्क हो जाता है जिसके बाद बिक्री शुरू हो जाती है। प्रति बटेर 60 रुपये की दर से बिक्री की जा रही है। उन्होंने बताया कि गांव की अपेक्षा शहर से अधिक ग्राहक आते है।

समूह की एक और सदस्य श्रीमती राजेश्वरी यादव ने बताया कि गोठान बनने से आजीविका की गतिविधियां निरंतर संचालित हो रही हैं जिससे रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोठान में सब्जी की खेती भी की जा रही है। अभी गोभी और बैगन लगाया जा रहा है। इसके साथ ही हल्दी और अदरक की खेती भी की गई है। उन्होंने बताया कि गोठान में अब तक करीब 50 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री कर लिए है।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर संजीव कुमार झा के मार्गदर्शन में केशवपुर गोठान को मल्टी एक्टिविटी सेन्टर के रूप में विकसित की जा रही है। यहां नेपियर घास, गेंदा फूल की खेती, बटेर पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, सब्जी की खेती, वर्मी कंपोस्ट निर्माण का कार्य समूह की महिलाओं द्वारा की जा रही है।

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